प्रगतिशील मगही समाज का चिंतन शिविर संपन्न, शिक्षा, कृषि, भाषा-संस्कृति और रोजगार पर हुई गंभीर चर्चा



प्रगतिशील मगही समाज का चिंतन शिविर संपन्न, शिक्षा, कृषि, भाषा-संस्कृति और रोजगार पर गंभीर  चिंता चता

प्रगतिशील मगही समाज का चिंतन शिविर संपन्न, शिक्षा, कृषि, भाषा-संस्कृति और रोजगार पर हुई गंभीर चर्चा

नवीनगर (औरंगाबाद), बिहार। औरंगाबाद जिले के नवीनगर प्रखंड के बैरिया में प्रगतिशील मगही समाज द्वारा एक दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में समाज, शिक्षा, कृषि, संस्कृति एवं रोजगार से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।







वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का बढ़ता व्यावसायीकरण समाज में असमानता को बढ़ावा दे रहा है। इसलिए शिक्षा को लाभ कमाने का माध्यम बनाने के बजाय सभी के लिए सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और मानवीय बनाया जाना चाहिए।

चिंतन शिविर में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए कृषि को उद्योग का दर्जा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इससे किसानों को बेहतर सुविधाएँ, निवेश, तकनीकी सहयोग और रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

बैठक में मगही भाषा एवं स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने नई पीढ़ी में अपनी मातृभाषा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही समाज में बढ़ती अश्लीलता और अपसंस्कृति पर रोक लगाने तथा स्वस्थ सांस्कृतिक वातावरण के निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

बेरोजगारी की समस्या पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रउत (PROUT) की विचारधारा के आधार पर स्थानीय संसाधनों का सदुपयोग कर आत्मनिर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्था विकसित की जा सकती है। स्थानीय स्तर पर लघु एवं कुटीर उद्योग, कृषि-आधारित उद्योग तथा सहकारिता आधारित उत्पादन व्यवस्था को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

शिविर में उपस्थित लोगों ने समाज के सर्वांगीण विकास, आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक संरक्षण तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया।

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