हाजीपुर। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, मानसिक सशक्तिकरण एवं चरित्र निर्माण के उद्देश्य से गुरुकुल विद्यापीठ, हाजीपुर में आनंद मार्ग योग मनोविज्ञान (Yoga Psychology) पर आधारित एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में विद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा मन, मस्तिष्क और व्यक्तित्व विकास से जुड़े वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक विषयों पर गहन जानकारी प्राप्त की
शिविर के दौरान धर्मेंद्र सिंन्हा ने विद्यार्थियों को मन के विज्ञान (Psychology of Mind) की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मनुष्य का मन स्वभावतः चंचल होता है। यदि उसे उचित दिशा, सकारात्मक संस्कार एवं अनुशासित जीवनशैली न मिले तो विद्यार्थियों में पढ़ाई में मन न लगना, बार-बार ध्यान भटकना, पढ़ा हुआ विषय भूल जाना, परीक्षा के समय तनाव या घबराहट महसूस होना, आत्मविश्वास में कमी तथा निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होना जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए मन को समझना और उसे सही दिशा देना अत्यंत आवश्यक है।
धर्मेंद्र सिंन्हा ने न्यूरोप्लास्टिसिटी (Neuroplasticity) के वैज्ञानिक सिद्धांत को सरल भाषा में समझाते हुए बताया कि मानव मस्तिष्क में स्वयं को बदलने और नई आदतें विकसित करने की अद्भुत क्षमता होती है। नियमित ध्यान, योग, सकारात्मक चिंतन, अनुशासित दिनचर्या तथा सतत अभ्यास के माध्यम से मस्तिष्क में नए तंत्रिका संबंध (Neural Connections) विकसित होते हैं, जिससे स्मरण शक्ति, एकाग्रता, सीखने की क्षमता, निर्णय शक्ति तथा रचनात्मक सोच में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
शिविर में विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि आधुनिक समय में मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और डिजिटल व्यस्तताओं के कारण एकाग्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों में योग, ध्यान और मानसिक अनुशासन विद्यार्थियों को मानसिक संतुलन बनाए रखने, तनाव कम करने तथा अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सैद्धांतिक सत्र के पश्चात प्रतिभागियों को योगासन, प्राणायाम, विभिन्न मुद्राओं तथा सरल ध्यान (Guided Meditation) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि इन अभ्यासों के नियमित अभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत, मस्तिष्क सक्रिय तथा स्मरण शक्ति और फोकस में उल्लेखनीय सुधार होता है। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ सभी अभ्यासों में भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को समय प्रबंधन, सकारात्मक सोच, आत्मअनुशासन, लक्ष्य निर्धारण तथा दैनिक जीवन में योग को अपनाने के महत्व पर भी प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, जागरूक, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक का निर्माण करना है।
शिविर के समापन पर विद्यार्थियों ने नियमित योग, ध्यान एवं अनुशासित जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। विद्यालय परिवार ने इस प्रकार के व्यक्तित्व विकास, मानसिक स्वास्थ्य एवं योग मनोविज्ञान आधारित प्रशिक्षण शिविरों को भविष्य में भी निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने इस पहल को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, मानसिक संतुलन और अध्ययन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।







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